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शेयर का इंट्रिंसिक वैल्यू कैसे निकाले Intrinsic value in hindi,company ki intrinsic value kaise nikale

How to find the Intrinsic value of shares in hindi| किसी भी शेयर का इंट्रिंसिक वैल्यू कैसे निकाले|

दोस्तो जब भी हम शेयर मार्केट में किसी भी शेयर को देखते हैं तो रोज उसकी दाम ऊपर नीचे होती रहती हैं और रोज अलग अलग दिखती है यह देखकर हमारे मन में एक प्रश्न उठती है की किस दाम पर खरीदे कौनसा दाम सही हैं खरीदना ? अगर आपके भी मन में ऐसा कुछ प्रदान हैं तो यह ब्लॉग में आपको पूरी जानकारी मिलेगी इसलिए मैं आपसे रिक्वेस्ट करूंगा की आप इसे पूरा पढ़े।

What is an Intrinsic value |Intrinsic value kya hain 

दुनिया के सबसे अमीर इन्वेस्टर Warren Buffet कहते हैं investing की दुनिया में सबसे जरूरी ये तीन शब्द हैं मार्जिन  ऑफ सेफ्टी इसका मतलब यह हैं कि जब आप कोई स्टॉक खरीदते हो तो आपको शेयर के इंट्रिसिक वैल्यू से कम मूल्य में खरीदना चाहिए और एक मार्जिन ऑफ सेफ्टी रखना चाहिए लेकिन अगर आपको इंट्रिंसिक वैल्यू कैलकुलेट करना ही नही आता तो आप मार्जिन ऑफ सेफ्टी कैसे स्तिमाल करोगे।तो आज हम जानेंगे की कोई भी कंपनी की रियल वैल्यू कैसे पता लगाए जिस से आपको यह पता चल सके कि वो स्टॉक महंगे में बिक रहा हैं या सस्ते में और इसको मैं एकदम सरल भाषा में समझाऊंगा की कोई भी आसानी से समझ सके। यह पूरा पढ़ेने के बाद आप अपने प्रॉफिट को कैसे बढ़ा सकते हैं या आप अपने लॉस को कैसे काम कर सकते हैं यह पूरा सिख जायेंगे इस बात की मेरी गारंटी हैं । 

Share Market

हम( intrinsic value) इंट्रिंसिक वैल्यू क्यों निकलते हैं? company ki intrinsic value kaise nikale

तो दोस्तो हमलोग किसी भी स्टॉक का प्राइस इसलिए निकलते हैं क्युकी उसका मूल्य और उसकी वैल्यू दोनो अलग अलग होती हैं| अब क्युकी स्टॉक मार्केट एक ऑक्शन (Auction) Market जहा स्टॉक बेचे नही जाते बल्कि नीलम किए जाते हैं और इंडिया में  5000 से भी ज्यादा कंपनी हैं तो इस से होता ये हैं की जो स्टॉक्स ज्यादा लोकप्रिय है वो बहुत ज्यादा महंगे दाम पर बिकते हैं और जो स्टॉक्स न्यूज में नहीं आते वो सस्ते में बिकते हैं तो ऐसे स्टॉक्स अंडरवाल्यूड रहते हैं जो एक अच्छे इन्वेस्टमेंट्स होते हैं अब दोस्तो हमलोग एक गूगल सर्च (google search) से किसी भी स्टॉक का दाम जन सकते हैं  लेकिन उसकी intrinsic Value (इंट्रिंसिक वैल्यू) हमे ही पता लगानी पड़ती हैं । दोस्तो जितने भी महान इन्वेस्टर्स होते हैं जब वो किसी भी कंपनी में इन्वेस्ट करने का सोचते हैं तो वो उस कंपनी का प्राइस नहीं चेक करते हैं वो पहले उस कंपनी की खुद से वैल्यू निकलते हैं और उसके बाद उसको मार्केट प्राइस से कंपेयर करते हैं  ताकि उसका प्राइस उनके एनालाइज (analyze) को इनफ्लुएंस न करदे |

 Intrinsic Value (इंट्रिंसिक वैल्यू ) कैसे निकालते है |Intrinsic value kaise nikale 

उधारण के लिए हम एक प्राइवेट कंपनी को ले लेते हैं जिसका मार्केट प्राइस हमारे पास नहीं हैं और हम सीखेंगे उसका intrinsic value कैसे  निकालते हैं (How to find intrinsic value /company ki intrinsic value kaise nikale ):

तो मानलो आपका नाम रमेश हैं और आप एक छोटे से गांव में रहते हो और वहा पर एक शॉप  हैं जिसका नाम हैं इंडियन केक शॉप अब ये शॉप पच्चास वर्ष पुरानी है और एकदम अच्छे जगह पर हैं  और इसीलिए इनके बहुत सारे रेगुलर कस्टमर हैं जो इनके प्रोडक्ट्स को हमेशा खरीदना पसंद करते हैं  और ये केक शॉप का मालिक आपका बहुत अच्छा मित्र है तो एक दिन वो आपके पास आता हैं और कहता है की "वो इस केक शॉप को पूरी तरह बेचना चाहता हैं "  अब आपके पास बहुत पैसा हैं और फाइनेंशियल नॉलेज भी  तो आप उसके पिछले 10 वर्ष की सारी फाइनेंशियल स्टैमेंट्स मांगते हो  और घर जाकर उसे अच्छे से analyze करते हो  अब स्टॉक मार्केट की तरह यहां पर कोई प्राइस तो हैं नहीं  तो आपको इसका सारा वैल्यूएशन खुद से करना पड़ेगा । अब आप सबसे पहले इसका income statement पढ़ते हो  और देखते हो की इस शॉप ने consistency  के साथ  हमेसा प्रॉफिट कमाया हैं और आप फिर मार्केट में जाकर थोड़ी रिसर्च करते हो  और ये पता लगाते हो इनके केक की क्वालिटी बहुत अच्छी हैं और लोगो को बहुत पसंद है और इनके कस्टमर्स भी इनके ऊपर बहुत ट्रस्ट करते है जिसके वजह से इनके कस्टमर्स बार बार इनके पास से ही खरीदते हैं। तो अपने फाइनल किया की ये शॉप के प्रॉफिट बढ़ते रहते हैं और बढ़ता रहेगा तो आप इसका क्वालिटी एनालिसिस करलेटे हो  और लेने की सोच लेते हो ।

Note- इन्वेस्टमेंट से पहले आपको उस कंपनी का एनालिसिस करना बहुत जरूरी होता हैं 

अब आप इसका intrinsic value निकालते हो की इसको किस दाम पर लेनी चाहिए  तो मान लेते हैं उस केक शॉप का yearly प्रॉफिट होता हैं 10 लाख का और ये भी देखते हो इनके कस्टमर्स इनसे ज्यादा उधर मांगते नही हैं  तो इनका जो प्रॉफिट हैं वो सीधे कैश (Cash) में कन्वर्ट हो जाता है । और इसको फाइनेंस में कहते हैं Cash flow from operating activities अब क्युकी ये केक शॉप उतनी रिस्की नही हैं जैसा कि हमने quality analysis में पता लागया तो अगर इस शॉप से आपको 14% का भी रिटर्न मिल जायेगा तो आप खुस हो  तो इस बिजनेस का वैल्यू निकलने का Formula कुछ ये होगा 

Earning/required rate of return = 10 lakh/0.14 तो आयेगा 71,42,857 तो हुआ क्या हैं अब हम ये समझते है मान लो आपने इस दाम पर ये कंपनी खरीद ली हैं तो जैसा की हमने माना की इस कंपनी से हमे 14% का हर साल रिटर्न चाहिए तो आपको पहले साल 10 लाख रुपए का प्रॉफिट मिलेगा जैसा आपने अनुमान लगाया था यानी 71,42,857 का 14%। तो ये प्रॉफिट आपको मिलता रहेगा जो आपके इन्वेस्टमेंट पर 14% का रिटर्न होगा ।

दोस्तो इसको DCF यानी Discounted Cash Flow Method of Valuation कहते है क्युकी आप कंपनी के future profits को पहले ही प्रेंस्ट वैल्यू में ला रहे हो । अगर आप लोगो को ये थोड़ा मुश्किल लग रहा है तो मैं आपको थोड़ा और सरल भाषा में समझता हू ।

दोस्तो जिस तरह हम कंपाउंडिंग में आज के पैसे को हम फ्यूचर में लेकर जाते हैं जैसे आजके 100 ग्रो होकर 14% के हिसाब से अगला साल 114 होगा और उसके अगला साल 114 का 14% से बढ़कर 130 रुपए होगा । तो डिस्काउंटिंग में हम ठीक इसका उल्टा करते है । हम फ्यूचर के प्रॉफिट्स को डिस्काउंट करके प्रेजेंट में लाते है और उसे काम करते हैं तो अगर आपको 114 रुपए अगले साल मिलने वाला हैं तो वो 14% के डिस्काउंट रेट के हिसाब से अभी के समय 100 रुपए होगा। तो आशा करता हूं आपको समझ आया होगा एक गोल्डन स्टेटमेंट "The value of any asset is the present value of all the expected future cash flows". बहुत लोगो को ये स्टेटमेंट  अब अच्छे से समझ आएगी की किसी भी बिजनेस का फ्यूचर कैश फ्लोज को हम अभी यानी प्रेजेंट के वैल्यू में लेकर आते है  Required Rate of Return के हिसाब से ।

अब हम Price to earning ratio (PE) Ratio को गहराई में समझते हैं जो अब हम अच्छे से समझेंगे

 

 (Price to earning ratio role in intrinsic value of stock )

अब हम कंपनी के PE Ratio को गहराई में समझते हैं , तो सबसे पहले हम जानते हैं की इस कंपनी का PE Ratio कितना होगा।उसके लिए हमलोग को कंपनी के प्राइस को उसके अर्निंग से Divide करना होगा । यानी 71.42÷ 10 लाख =7.14 होगा।इसका मतलब ये हैं की आपको अपना इन्वेस्ट किया हुआ पैसा लगभग सात वर्षो में वापस मिलेगा।

अब जैसे आप ये रिलायंस के शेयर में देख सकते हो  की आप 34 रुपए पहले ही दे रहे हो 1 रुपए कमाने के लिए  इसलिए यहा लिखा हैं की यह अपने intrinsic value से ज्यादा हैं।

बहुत लोग प्रचलित स्टॉक ले लेते हैं जिनकी प्राइस बहुत ज्यादा ओवर वैल्यूड होती हैं यह सोचकर की ये इसी तरह बढ़ते रहेगी लेकिन आपको ऐसे शेयर मैं प्रॉफिट बहुत कम मिलेगी क्युकी मान लो अगर उसकी PE Ratio 1000 है  तो आपका पैसा बहुत लंबे समय बाद डबल होगा लगभग 1000 वर्ष। लोगो को जब तक टिप या न्यूज मिलती हुआ तब वो शेयर बहुत ज्यादा ओवर वैल्यूड हो चुका होता हैं। और जो कंपनी इतने स्पीड से ग्रो होती हैं वो उतने ही स्पीड से नीचे आती हैं यह इतिहास गवाह हैं।

इसलिए हम जब भी इन्वेस्ट करे तो हमे हमेशा उसके intrinsic value of shares(इंट्रिसिक वैल्यू )के नीचे ही खरीदने चाहिए।


अगर आपको कक्रिप्टो करेंसी में इंटरेस्ट है तो आप इसे पढ़ सकते है  (click here



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इन्हे भी पढ़े :–

1) शेयर मार्केट क्या हैं और इसकी शुरुआत कैसे करे।

2) इंडेक्स फंड क्या हैं।


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